750+ साल पुराने हनुमान जी मंदिर के जीर्णोद्धार में हमारा साथ दें
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750+ साल पुराने हनुमान जी मंदिर के जीर्णोद्धार में हमारा साथ दें
रामदूत रिस्टोर्स अपनी अगली जीर्णोद्धार परियोजना RR2 की घोषणा करते हुए बेहद उत्साहित है, जिसका उद्देश्य है गुजरात के पंच खोबला में स्थित प्राचीन हनुमान जी मंदिर को फिर से जीवंत करना। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण यह मंदिर 750+ साल पुराना है और हनुमान जी को समर्पित है, साथ ही शिव और देवी इसके अन्य प्रमुख देवता हैं।
हमारा मिशन इस मंदिर को उसका पुराना गौरव लौटाना है, ताकि यह पूजा और सामुदायिक जीवन का जीवंत केंद्र बना रहे।
परियोजना की झलक: स्थान
पंच खोबला गाँव में बसा यह मंदिर हरे-भरे जंगलों से घिरा है और एक पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ से प्रकृति के सुंदर दृश्य और एक पूज्य शक्तिपीठ की झलक दिखती है। यह शांत स्थान आध्यात्मिक चिंतन और प्रकृति से जुड़ाव के लिए एक सुकून भरा आश्रय है।
महत्व और वर्तमान स्थिति
हनुमान जी मंदिर हमारी विरासत का अहम हिस्सा है और हमारी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। दुर्भाग्य से सदियों में इसने बहुत कुछ झेला है, हिंसक हमलों और उपेक्षा के घाव इस पर साफ़ दिखते हैं। कभी भव्य रहा यह ढाँचा आज टूटी मूर्तियों, क्षतिग्रस्त शिल्प और ढहते ढाँचे के साथ तुरंत जीर्णोद्धार की राह देख रहा है। जर्जर हालत के बावजूद मंदिर का स्थापत्य उसके पुराने गौरव की झलक देता है, और हम उसकी विरासत का सम्मान करने और उसे सहेजने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हमारा मिशन
हनुमान जी मंदिर का जीर्णोद्धार सिर्फ़ एक परियोजना नहीं, बल्कि अपने इतिहास को वापस पाने और एक पावन स्थल को फिर से जीवंत करने का मिशन है। हमारा लक्ष्य इसकी संरचना को मज़बूत करना, नुकसान की मरम्मत करना और इसकी ऐतिहासिक भव्यता लौटाना है। यह जीर्णोद्धार पूजा और सामुदायिक गतिविधियों के लिए एक मिलन स्थल देगा और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से गहरा जुड़ाव बनाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मंदिर का इतिहास
मंदिर के पास मिले शिलालेखों के आधार पर माना जाता है कि हनुमान जी मंदिर का निर्माण शक संवत 1372 में तक्षण्य वंश के राणा के ज्येष्ठ पुत्र रबियास्वामी ने करवाया था। नागर शैली में बने इस मंदिर में कई प्रवेश द्वार थे, जिसका संकेत स्थल पर मिले पाँच कीर्तिमुखों से मिलता है। बलुआ पत्थर का उपयोग और बारीक नक्काशी इसके कलात्मक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं।
स्थापत्य की विशेषताएँ
यह मंदिर अपने युग की स्थापत्य प्रतिभा को दर्शाता है, जिसमें बारीक और परिष्कृत डिज़ाइन हैं। मूल ढाँचे का लगभग 80% हिस्सा आसपास बिखरा मिला है। ग्रामीणों ने गर्भगृह जैसा एक ढाँचा फिर से जोड़ा है, लेकिन उसे मूल डिज़ाइन के अनुरूप जीर्णोद्धार की ज़रूरत है। खंभों और छतों में इंटरलॉकिंग तकनीक का उपयोग उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग दिखाता है। दुर्भाग्य से मौसम की मार ने भित्तिचित्रों और नक्काशी को नुकसान पहुँचाया है।
वर्तमान स्थिति
हनुमान जी मंदिर अभी जर्जर हालत में है, और सिर्फ़ अस्थायी गर्भगृह ही उसके मूल रूप की थोड़ी झलक देता है। सीमेंट से जीर्णोद्धार की पिछली कोशिशें धन और विशेषज्ञता की कमी के कारण नाकाफ़ी रहीं। फिर भी स्थानीय समुदाय और प्रशासन का भरपूर सहयोग है, जो इस जीर्णोद्धार के महत्व को दिखाता है।
परियोजना के लक्ष्य: जीर्णोद्धार के लक्ष्य
- ढाँचे की मरम्मत: मंदिर की नींव और ढाँचे को मज़बूत करना और उसकी मरम्मत करना।
- नक्काशी और भित्तिचित्र: देवताओं, पशुओं और ऐतिहासिक दृश्यों को दर्शाती बारीक नक्काशी और भित्तिचित्रों का जीर्णोद्धार।
- देवता और मूर्तियाँ: मंदिर की आध्यात्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए क्षतिग्रस्त या खोई हुई देव प्रतिमाओं और मूर्तियों को फिर से बनाना और स्थापित करना।
- प्राचीन शैली में पुनर्निर्माण: मंदिर को उसके मूल डिज़ाइन और स्थापत्य शैली के अनुसार बारीकी से फिर से बनाना।
दीर्घकालीन दृष्टि
लंबे समय में हम हनुमान जी मंदिर परिसर को एक जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में देखते हैं:
• दूसरे चरण का विकास:
एक परिसर बनाना: ऐसा सांस्कृतिक परिसर बनाना जिसमें हों:
- प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन के लिए एक पाठशाला।
- आध्यात्मिक साधना के लिए एक ध्यान केंद्र। विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए कमरे और ठहरने की व्यवस्था।
- जागरूकता अभियान: समुदाय को स्वतंत्र हिंदू मंदिरों के महत्व के बारे में जागरूक करना और ऐसे ही जीर्णोद्धार कार्यों को बढ़ावा देना।
- आत्मनिर्भर व्यवस्था: एक ऐसा व्यापक परिसर बनाना जो आने वाली पीढ़ियों के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों को सहारा दे।
सहयोग के लाभ
- सांस्कृतिक असर: आपका दान हमारी विरासत के एक अहम हिस्से के जीर्णोद्धार में मदद करेगा, ताकि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे।
- सामुदायिक विकास: यह परियोजना स्थानीय लोगों को जीर्णोद्धार के काम से जोड़कर उन्हें आजीविका के अवसर देगी।
- शैक्षिक सशक्तिकरण: पाठशाला और ध्यान केंद्र की स्थापना से समुदाय में आध्यात्मिक विकास और जागरूकता बढ़ेगी।
- विरासत निर्माण: इस परियोजना में योगदान देकर आप हिंदू सभ्यता के एक अहम स्तंभ के जीर्णोद्धार में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
निष्कर्ष
प्राचीन हनुमान जी मंदिर का जीर्णोद्धार हमारी विरासत को सहेजने और हमारे समुदाय को फिर से जीवंत करने का संकल्प है। हम आपको इस पुण्य कार्य में हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं। साथ मिलकर हम इस पावन स्थल में नई जान डाल सकते हैं, ताकि यह हमारे इतिहास का साक्षी और आने वाली पीढ़ियों के लिए पूजा का स्थान बना रहे।
हमारे प्रस्ताव पर विचार करने के लिए धन्यवाद। इस महत्वपूर्ण कार्य में आपके साथ जुड़ने के अवसर की हमें प्रतीक्षा है।
हमारी प्रगति पर एक नज़र:
- सरपंच, स्थानीय ग्रामीणों और सभी ज़रूरी प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से हमें ग्राम पंचायत की औपचारिक अनुमति मिल गई है।
- मंदिर के आध्यात्मिक स्वरूप के सम्मान में हमारी टीम ने स्थल पर पूजा की और जीर्णोद्धार यात्रा के लिए आशीर्वाद माँगा।
- खुदाई का काम शुरू हो गया है, जिससे ढाँचे के विवरण और ऐतिहासिक नींव सामने आ रही है, जो जीर्णोद्धार के डिज़ाइन के लिए ज़रूरी है।
- हमने मिट्टी की जाँच और भूमि सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, जिससे हमारी स्थापत्य टीम एक मज़बूत और टिकाऊ नींव की योजना बना सके, जो मंदिर की प्राचीन संरचना का सम्मान करे।
भूमि सर्वेक्षण पूरा – मंदिर के ढाँचे का नक्शा तय करने के लिए विस्तृत भूमि सर्वेक्षण किया गया। यह अहम कदम सुनिश्चित करता है कि पुनर्निर्माण पारंपरिक मंदिर स्थापत्य के अनुसार हो और मज़बूत व टिकाऊ भी रहे।
कारीगरों और टीम के लिए शेड तैयार – निर्माण कार्य को आसान बनाने के लिए हमने एक शेड ढककर अपने शिल्पकारों, कारीगरों और टीम के सदस्यों के लिए काम की जगह बनाई है।
भूमि पूजन संपन्न – प्राचीन परंपराओं के अनुसार हमने भूमि पूजन किया और जीर्णोद्धार की शुद्धता और सफलता के लिए दिव्य आशीर्वाद माँगा।
पुराने ढाँचे को खोलना – क्षतिग्रस्त मंदिर ढाँचे के अवशेषों को सावधानी से खोला गया, दोबारा इस्तेमाल होने लायक हिस्सों को सहेजा गया और पुनर्निर्माण के लिए ज़मीन तैयार की गई।
नींव की खुदाई पूरी – नींव की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो गई है, जिससे मंदिर के पुनरुद्धार के लिए मज़बूत आधार तैयार हुआ है।
ध्रांगध्रा पत्थरों का आगमन – टिकाऊपन और पारंपरिक महत्व के लिए चुने गए असली ध्रांगध्रा बलुआ पत्थर की पहली खेप स्थल पर पहुँच गई है, जिसे तराशकर जोड़ा जाएगा।
शिलान्यास पूजन संपन्न – शिलान्यास (नींव का पत्थर रखने) का पावन अनुष्ठान हो गया है, जिससे दिव्य आशीर्वाद के साथ मंदिर निर्माण की शुरुआत हुई।
15 फ़ुट गहरी पत्थर की नींव तैयार – 15 फ़ुट गहरी मज़बूत पत्थर की नींव बनाई गई है, ताकि मंदिर पीढ़ियों तक मज़बूती से खड़ा रहे।
नया ढाँचा उठ रहा है – नींव तैयार होने के साथ नए मंदिर ढाँचे का निर्माण आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है, जो हमें इस पावन स्थल को उसकी प्राचीन भव्यता लौटाने के और करीब ला रहा है।
नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और फ़ाइलों के आपके डिवाइस पर डाउनलोड होने तक इंतज़ार करें।
हमारे मंदिर के दर्शन करें
मंदिर कोटेशन का ब्योरा
इसमें सिर्फ़ ढाँचे का खर्च शामिल है।
- मंडोवर₹17,18,750 21%
- घुमट₹14,12,500 17%
- शिखर₹9,37,500 12%
- थंभाला₹9,37,500 12%
- चोकी समरण₹8,12,500 10%
- मुख्य समरण₹6,87,500 8%
- पाट₹5,62,500 7%
- केवड़₹4,37,508 5%
- छतिया₹4,00,000 5%
- रंग मंडप घुमट₹2,00,000 2%
कुल₹81,06,258
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मंदिर कोटेशन का ब्योरा
इसमें सिर्फ़ ढाँचे का खर्च शामिल है।
- मंडोवर₹17,18,750 21%
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- चोकी समरण₹8,12,500 10%
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- पाट₹5,62,500 7%
- केवड़₹4,37,508 5%
- छतिया₹4,00,000 5%
- रंग मंडप घुमट₹2,00,000 2%
कुल₹81,06,258
हमारे दानदाता
Dhananjay Chavhan
नवम्बर 3, 2026
Uttkarsh Singh
नवम्बर 3, 2026
गुमनाम
नवम्बर 3, 2026
Sumit Prasad
नवम्बर 2, 2026
Uttkarsh Singh
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